geeton ke badal - [ 2]
सोमवार, 25 जुलाई 2011
सुबह जो भीग कर आई ,न सूखीं शाम तक पलकें,
घटाओं में घिरीं थीं जो ,तुमारी रेशमीं अलकें,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें