शनिवार, 11 जून 2011

खामोशियों के बीच क्यों , जलजला- सा उठ रहा है,
क्या बतायें आपको हम ,आज क्या-क्या उठ रहा है,
जिन्दगी हैरान है बस , जिंदगी पर इस तरह,
तूफ़ान दर्दे- दिल बतादे , क्यों सुलगकर उठ रहा है,
थे यहाँ मौंसम हजारों खुशनुमा रंगीनियों के ,
जो तुम्हारे ही लिए थे गाज उनपर गिर गई है,
इस कदर धड़कन सिहरकर रह गयीं हैं अनमनी -सी,
उँगलियों पर चोट कोई ,साज की ही लग गयी है,

शुक्रवार, 10 जून 2011

जिन्दगी के हर सफे पर मौत के दसखत हुए हैं,
चाहता हूँ मौत पर भी ,जिन्दगी दसखत करे अब
प्यार में भीगी हुई वो हसरतें जिन्दा रहें सब,
खिल उठें ऐसी फिजायें , हर सुबह दसखत करे अब ,
दर्द से मेरी हिफाजत ,हो नहीं सकती कभी,
बिन तुम्हारे जिन्दगी ये ,जी नहीं सकती कभी,
मान लो इक प्यार का नगमा सुना था बस कभी,
गुनगुनाने से तस्सल्ली हो नहीं सकती कभी,

गुरुवार, 9 जून 2011

है बहुत आसान दिल के जख्म धोकर बह निकलना,
बंद पलकों में समाये रास्तों से हो गुजरना,
क्या पता हर बूँद में इक दर्द का बादल भरा हो,
हो सके तो आज मेरे घर जरा जमकर बरसना ,