कभी सूरज निकलता है ,कभी बदली में छिपता है,
कभी कलियाँ चटखतीं है,कभी किरने उतरतीं हैं ,
कभी उनकी निगाहों में ,कभी अपनी निगाहों में .
बिछी जो ओस रहती है किसी ने दिल उतारा है .,
शनिवार, 23 जुलाई 2011
शुक्रवार, 22 जुलाई 2011
गुरुवार, 21 जुलाई 2011
शाम का सूरज दला है, बृक्ष गुमसुम से खड़े हैं,
पक्षियों के दल थके- से लौट कर वापस चले हैं ,
एक पूरा दिन गुजर कर , रह गया है इस तरह फिर,
जिन्दगी के स्वप्न जैसे शाख पर वापस चले हैं,
भोर के पंछी उड़े थे , भोर की पहली किरन तक,
साँझ के पंछी उड़े हैं , शाम की अंतिम किरन तक,
पंछियों की ये उड़ानें ,क्या संदेशा दे रहीं हैं,
जिन्दगी अभियान है इक ,जिन्दगी के अवतरण तक ,
एक पंछी जो कभी भी चैन से सोता नहीं है,
वो जहाँ की सब हदों को तोड़ देना चाहता है,
वो तुम्हारे वास्ते ही उड़ रहा है अनवरत -सा ,
वो सितारे सब गगन के तोड़ लेना चाहता है ,
पक्षियों के दल थके- से लौट कर वापस चले हैं ,
एक पूरा दिन गुजर कर , रह गया है इस तरह फिर,
जिन्दगी के स्वप्न जैसे शाख पर वापस चले हैं,
भोर के पंछी उड़े थे , भोर की पहली किरन तक,
साँझ के पंछी उड़े हैं , शाम की अंतिम किरन तक,
पंछियों की ये उड़ानें ,क्या संदेशा दे रहीं हैं,
जिन्दगी अभियान है इक ,जिन्दगी के अवतरण तक ,
एक पंछी जो कभी भी चैन से सोता नहीं है,
वो जहाँ की सब हदों को तोड़ देना चाहता है,
वो तुम्हारे वास्ते ही उड़ रहा है अनवरत -सा ,
वो सितारे सब गगन के तोड़ लेना चाहता है ,
बुधवार, 20 जुलाई 2011
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