जो तुम्हें मैं दूंद लाऊँ ,कुछ मुझे ऐसी खबर हो,
जो पता तेरा लगा दे ,जिन्दगी की वो खबर हो ,
चाँद -सूरज चल रहे हैं ,इस तरफ से उस तरफ तक ,
रोज ही वो आ रहे हैं, उस तरफ से इस तरफ तक,
क्यों नहीं मुझको बताते ,रोज इतना क्यों सताते ,
जिस तरह उनको तुम्हारी छेड़खानी की खबर हो,
कौन जीता है यहाँ पर , कौन मिटता है यहाँ पर ,
लुक छिपी का खेल यह क्यों , रोज चलता है यहाँ पर ,
किस महोब्बत से मिले थे ,किस महोब्बत से जिए थे ,
क्या पता इन बादलों को ,उस कहानी की खबर हो,
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