मंगलवार, 2 अगस्त 2011

मैं भला सोया कहाँ था , ख्वाब पलकों में भरे थे ,
जिन्दगी के कुछ रूहानी -आब पलकों में भरे थे,
जो ख्यालों में बसे ,महताब पलकों में बसे थे ,
था न उत्तर जिस नबीं का जबाब पलकों में भरे थे

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