geeton ke badal - [ 2]
बुधवार, 6 जुलाई 2011
आँसू से भीगी चादर पर ,प्यार सिसकता है क्यों तेरा,
याद सिसकतीं हैं क्यों तेरी ,जिस्म फड़कता है क्यों तेरा,
तेरी खिड़की के बाहर क्यों ,इतना सन्नाटा पसरा है,
तुझे सुलाने वाली रातें ,पल-पल मुझसे पूछ रहीं हैं,
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