मंगलवार, 5 जुलाई 2011

कल कोई ख्वाब आया था ,बेहिसाब आया था ,
पूरे जहाँ का हुस्न समेट कर ले आया था ,
आखिर नींद में भी हमारे कयामत आ गई ,
हमने तो एक शोला शबनम से बुझाया था /

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