मंगलवार, 19 जुलाई 2011

शाम का सूरज दला है, बृक्ष गुमसुम से खड़े हैं,
पक्षियों के दल थके- से लौट कर वापस चले हैं ,
एक पूरा दिन गुजर कर ,इस तरह से रह गया फिर,
जिन्दगी के स्वप्न जैसे शाख पर वापस चले हैं,-

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