बुधवार, 20 जुलाई 2011

भोर के पंछी उड़े थे , भोर की पहली किरन तक,
साँझ के पंछी उड़े हैं , शाम की अंतिम किरन तक,
पंछियों की ये उड़ानें ,क्या संदेशा दे रहीं हैं,
जिन्दगी अभियान है इक ,जिन्दगी के अवतरण तक ,

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