geeton ke badal - [ 2]
गुरुवार, 14 जुलाई 2011
इंसानियत को जख्म दे,हैवानियत चलने लगी ,
आदमी से आदमी की ही शख्शियत डरने लगी ,
आतंक से जीना यहाँ ,आतंक से मरना यहाँ ,
सभ्यता क्यों सभ्यता की आवारियत से मरने लगी ,
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