geeton ke badal - [ 2]
सोमवार, 20 जून 2011
हों न शायद ,इस जहाँ में,दर्द के चर्चे हमारे,
किन्तु आयेंगे उतरकर ,प्यार के मौसम हमारे,
गुनगुनायेंगी हवायें, बात पागल धड़कनों की,
कह रहे हो जो अभी तक , धड़कनों से तुम हमारे,
बेकसी की , हर कशिस तक, हम तुम्हारे हो रहे हैं/
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें